जगतगुरु, विश्व वंदनीय, संत शिरोमणि, श्रवण संस्कृति के नायक, चरित्र चूड़ामणि श्री आचार्य भगवन श्री 108 विद्यासागर जी मुनि महाराज के चरणों में बारंबार नमन
परम पूज्य 105 आर्य का श्री रिजु मति माताजी को हृदय से बारंबार नमन
आरिका संघ को बारंबार नमन
एवं
सभी जैन बंधुओं को
सादर जय जिनेंद्र सादर प्रणाम
"जब तक शिक्षा का मकसद नौकरी पाना होगा,
तब तक समाज में नौकर ही पैदा होंगे, मालिक नहीं"
शिक्षा का मकसद यह नहीं कि हम स्कूल या कॉलेज में पढ़ने से महान बन जाएंगे बल्कि शिक्षा का मतलब संस्कारों से भी आता जाता है / जब तक इंसान के अंदर तेरा मेरा रहेगा तो वह शिक्षित नहीं बल्कि जानवर से भी गिरा हुआ होगा,
अरे शिक्षित इंसान का मतलब तो वह है जो इंसान बिना किसी लोग के समाज में पल रही कुरीतियों को दूर करें और समाज के लोगों की बिना किसी लोग के उनकी प्रगति में मदद करें अरे आज दुनिया में शिक्षा पर या का पर्यायवाची नौकरी पाने का यंत्र मात्र है क्या है तभी तो समाज में नौकर ही पैदा होते हैं मालिक नहीं मैं तो बस इतना कहना चाहती हूं कि नौकर और मालिक के भेद को समझने की जरूरत आन पड़ी है मालिक जो स्वयं के विवेक का इस्तेमाल करें नौकर जो केवल आदेशों का पालन करें मालिक जिसमें सृजन की क्षमता है नौकर जो केवल दिशा निर्देश पर चलता है सब पढ़ाया गया जिंदगी की पाठशाला में कौन-कौन षटकोण पर जीवन में जो हमेशा उपयोगी है उसे कभी नहीं पढ़ाया गया है वह है दृष्टिकोण आज हमारी दृष्टि केवल नौकरी पाने तक ही सीमित हो गई है तो क्या शिक्षा का काम बस नौकरी दिलाना है ज्ञान बुद्धि विद्या गुण अकल जैसे शब्द लगभग शिक्षा का पर्याय हैं तो वास्तविक शिक्षा क्या है इसका सही समझ आज के समय में विरले ही समझते हैं अन्यथा इसका अर्थ तो लोग कई प्रकार से लगाते हैं जैसा कि धर्म से पद से प्रतिष्ठा से ज्ञान के अभिमान से आदि-आदि शिक्षा का वास्तविक अर्थ तो उसकी ज्ञान ना हो करके व्यवहारिक ज्ञान से है वास्तव में शिक्षा का उद्देश्य सूचना नहीं परंतु समझ होती है शिक्षा का उद्देश्य कायदा नहीं परंतु व्यवस्था होती है शिक्षा का उद्देश कानून नहीं परंतु अनुशासन होता है शिक्षा का उद्देश्य नहीं परंतु भरोसा होता है शिक्षा का उद्देश्य शोषण नहीं परंतु पोषण होता है शिक्षा का उद्देश्य आग्रह नहीं परंतु आदर होता है शिक्षा का उद्देश्य संपर्क नहीं परंतु संबंध होता है शिक्षा का उद्देश्य अर्पण नहीं परंतु समर्पण होता है विकास ही वास्तविक शिक्षा है अनुभव से ज्ञान प्राप्त करना है वास्तविक शिक्षा है संस्कारों का हमारे व्यवहार में परिलक्षित होना ही वास्तविक शिक्षा है हमेशा याद रखिए शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ रोजी-रोटी तक सीमित नहीं बल्कि शिक्षा असल अर्थ में तो जीना सिखाती है एक अनपढ़ भी अपनी रोजी रोटी कमा लेता है और यहां तक कि जानवर भी अपना पेट भर लेता है बिना किसी शिक्षा ग्रहण किए तो अगर हमें मौका मिला है कि सभ्य समाज में रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे तो हमें इसे सही अर्थों में ग्रहण करना चाहिए आश्रित नहीं देन हार बने स्वयं के करता बने और समाज का उद्धार करें
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