मन में विचार उठता है।
कि बच्चों में भी डिप्रेशन हो सकता है।
यह कैसे अवस्था है ?
डिप्रेशन बच्चों को किस प्रकार घेर लेता है ?
किस प्रकार से डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है ?
समझने का एक प्रयास किया,
तो लगा बचपन ऐसी व्यवस्था है,
जिसमें किसी तरह की सामाजिक - पारिवारिक जिम्मेदारियां नहीं होती।
लेकिन कई बार हम देखते हैं,
कि रोजमर्रा में जीवन में नकारात्मकता का सामना बच्चों को सदैव करना पड़ता है।
जो कहीं ना कहीं डिप्रेशन का कारण बनता है।
ऐसे में क्या होता है, उनके व्यवहार में उदासी छा जाती है।
माता - पिता समझते हैं, कि इस तरह का व्यवहार जो बच्चा कर रहा है,
हो सकता है नींद की कमी के कारण, तबीयत ठीक ना होने के कारण,
पेट में दर्द होने के कारण इत्यादि
जरूरी है कि डिप्रेशन को समझें
साथ ही साथ उसके लक्षण को समझे। बच्चों के साथ समय बिताएं।
उन्हें भावनात्मक रूप से जुड़े और नकारात्मकता को कम करें।
बच्चों की बॉडी लैंग्वेज से समझा जा सकता है, किस हद तक डिप्रेशन हो रहा है।
बच्चों को प्यार से जुड़कर के सकारात्मक दिशा की ओर ले जाएं।
आज वर्तमान में नकारात्मकता का दौर है। हम स्वयं कई तरह की नकारात्मक भावों से घिरे हुए, हम स्वयं इन विपरीत परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
बच्चों को सकारात्मकता से जुड़े उन्हें अपने साथ समय व्यतीत करने के लिए प्रोत्साहित करें।
जिससे कि उनका जो खाली समय है वह आपके साथ व्यतीत होगा तो नकारात्मकता अपने आप कम होगी।
जीवन में परेशानियों से लड़ना सिखाएं।
वास्तविकता का आईना दिखाएं,
कहानियों के माध्यम से वास्तविक जीवन के पहलुओं को दिखाकर बच्चों को समझाना जरूरी है।
उनके मन को विकसित करना जरूरी है। उसके मन में यदि आपने सही विचार पैदा किए तो वे सकारात्मकता की ओर बढ़ेंगे।
बच्चे सकारात्मक रूप से जीवन में आगे बढ़ पाएंगे और अपने डिप्रेशन को दूर कर पाए।अन्य ने प्रश्नों के साथ मैं आपसे अगले एपिसोड में मिलूंगी।
धन्यवाद
https://anchor.fm/dr-rani-vaidya
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